नई किताब- मन तो पंछी भया

नई किताब- मन तो पंछी भया

रेणु के गांव से लेकर रामजी की ससुराल तक और प्रणय नगरी मांडू से लेकर मेघालय तक का संस्मरण है। नर्मदा की कहानी और अमरकंटक की खूबसूरती भी मनोहारी अंदाज में लिखी गई है। सिंगापुर की संस्कृति और मॉरीशस की माटी की महक भी है। अशोक कुमार सिन्हा की नई किताब ‘मन तो पंछी भया’ यात्रा संस्मरण के एक बेहतरीन उदाहरण के रूप में सामने आयी है। कुल 20 अध्यायों वाली यह किताब सिर्फ यात्रा-संस्मरण भर नहीं है, बल्कि हमें विचारों की एक नई दुनिया में भी ले जाती है। ज्ञान की गठरी भी खोलती है और खांटी बिहारी लेखन का अहसास भी दिलाती है। बिहारी किवदंतियों से लेकर तमाम विदेशी लेखकों की बातें को भी समाहित किया गया है। 176 पेज की इस किताब में जगहों का आंखों देखा वर्णन मन को बांध लेता है। खासकर पहाड़ों का वर्णन तो अविस्मरणीय है। पढ़ते वक्त ऐसा लगता है, जैसे हम लेखक के साथ-साथ घूम रहे हैं। ‘पूर्वोत्तर’ अध्याय में लिखते हैं- बादलों का चेरापूंजी से प्यार का रिश्ता है, तभी तो ये जब-जब दिल करता है, किसी बेसब्र प्रेमी की तरह चेरापूंजी को आगोश में ले लेते हैं…इसमें शब्दों की शानदार जादूगरी की गई है।
अशोक कुमार सिन्हा एक लेखक के साथ-साथ ब्यूरोक्रेट्स भी है। ऐसे में उनके लेखक मन और ब्यूरोक्रेट्स वाली जीवन की छाप भी इसमें साफ-साफ दिखती है। उनका लेखक मन सब कुछ घूम लेने और आंखों में भर लेने के लिए तैयार दिखता है, तो ब्यूरोक्रेट्स वाली मजबूरी, भागमभाग की स्थिति पैदा करती है। यही कारण है कि कई अध्याय जल्दीबाजी में लिखे हुए प्रतीत होते हैं। कई अध्याय बहुत छोटे हो गए हैं। पढ़ने के बाद लगता है कि इसमें और विस्तार की जरूरत है। बहरहाल, सिल्क नगरी भागलपुर, गणतंत्र की आदिभूमि वैशाली, हस्तशिल्पों की फुलवारी मिथिला, बुद्ध की नगरी बोधगया से लेकर बापू के साबरमती आश्रम सहित कई जगहों का शानदार वर्णन है। संस्मरण पढ़ते वक्त हर समय लगता है कि हम उस जगह पर ही खड़े हैं और अपनी आंखों से सब कुछ देख रहे हैं और यही चीज इस यात्रा-संस्मरण को उत्कृष्ठ बना देती है। कुल मिलाकर यह कमाल का यात्रा-संस्मरण है।

बॉक्स
नई किताब- मन तो पंछी भया
(यात्रा-संस्मरण)
लेखक- अशोक कुमार सिन्हा
प्रकाशक- रश्मि प्रकाशन, लखनऊ
मूल्य- 275 रुपये (सजिल्द)